सत्य

May 12, 2026by Nitin0

सीता विवाह और राम का राज्याभिषेक दोनों शुभ मुहूर्त में किया गया। फिर भी न वैवाहिक जीवन सफल हुआ न राज्याभिषेक। और जब मुनि वसिष्ठ से इसका जवाब मांगा गया तो उन्होंने साफ कह दिया।

 

“सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहूं मुनिनाथ। लाभ हानि, जीवन मरण,, यश अपयश विधि हाथ।।”

 

अर्थात, जो विधि ने निर्धारित किया है वही होकर रहेगा। न राम के जीवन को बदला जा सका, न कृष्ण के। न तो शिव सती की मृत्यु को टाल सके, जबकि मृत्युंजय मंत्र उन्ही का आवाहन करता है।

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